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Showing posts from November, 2025

दीपदान

सूर्यास्त का समय काशी का दशाश्वमेघ घाट जहां प्रथम शंखनाद से देवताओं का आवाहन किया जाता है। फिर शुरू होती है चारों ओर घंटियों, डमरूओ, शंखनादो, मृदंगो, मंत्रोचारणों की गूंज।  सुंदर वेशभूषा में दिखते पुजारी.. एक अनोखी महक के साथ उठती हुई आरती की ज्वाला.. आसमान को आगोश में लपेटता हुआ धुआं.... घाटों की सीढ़ियों पे सजा लाखों दिया.... और नदी में तैरते अनगिनत झिलमिलाते दिए.....हर तरफ जगमग-जगमग दियो की जगमगाहट मानो चांदनी रात में आसमान से धरती पे तारे उतर आए हो और इसके साथ गंगा नदी का मनोरम दृश्य बहुत सुंदर लगता है। काशी के अर्द्ध चंद्राकार घाट जब दीपों का हार पहनकर प्रज्ज्वल होते हैं तो इस स्वर्गिक आभा का दर्शन एक अद्भुत अनुभूति कराता है। भव्य गंगा आरती का साक्षी बनने हर शाम हजारों लोगों का हुजूम बनारस के घाट पर उमड़ पड़ता है। मंत्रों के उच्चारण, घंटों की आवाज, नगाड़ों की गूंज को सुन कर ऐसा लगता है कि ये हमारे अंतरात्मा को शुद्ध कर रही हो और आप उस दिव्य अनुभूति में ध्यान लगा कर आरती के स्वर में कही खो जाएंगे।  लेकिन कोई था जो उस भीड़ में भी घाट पे बैठ कहीं शून्य में खोया हुआ किसी इंतज...

५० नियम प्रेम के

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यहां प्रेम के ५० नियम दिए जा रहे हैं — ये नियम संवेदनशील, सच्चे और परिपक्व प्रेम को समझने और निभाने में हमारी मदद करेंगे।  --- 🌹 प्रेम के ५० नियम 🌹 (स्त्री के दृष्टिकोण से) 1. प्रेम अधीनता नहीं, आत्म-सम्मान है। 2. प्रेम में चुप्पी नहीं, संवाद जरूरी है। 3. किसी के लिए खुद को खो देना प्रेम नहीं होता। 4. प्रेम तब तक सुंदर है, जब तक वह स्वतंत्र है। 5. जब प्रेम में डर हो, तो वहाँ प्रेम नहीं बचता। 6. प्रेम में दोनों की आवाज़ बराबर होनी चाहिए। 7. प्रेम एक टीमवर्क है, तानाशाही नहीं। 8. "ना" कहना भी प्रेम का हिस्सा है। 9. हर दिन थोड़ा वक्त एक-दूसरे के लिए निकालना ज़रूरी है। 10. आत्मनिर्भरता प्रेम को मज़बूत बनाती है। 11. प्रेम में जलन नहीं, विश्वास होना चाहिए। 12. ईमानदारी प्रेम की नींव है। 13. हर बार सही होना ज़रूरी नहीं, साथ होना ज़रूरी है। 14. प्रेम मांगता नहीं, समझता है। 15. शब्दों की मर्यादा कभी न तोड़ो, चाहे कितनी भी नाराज़गी हो। 16. प्रेम में तुलना नहीं, स्वीकार्यता होनी चाहिए। 17. भावनात्मक प्रताड़ना भी हिंसा होती है — इसे नज़रअंदाज़ मत करो। 18. कोई रिश्ता इतना पव...

खिड़की... एक अधूरी मोहब्बत

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यह कविता एक अधूरी मोहब्बत की उस खिड़की पर लिखी गई है, जहाँ हर शाम उम्मीदें आकर ठहर जाती हैं। कभी लौटने की आस, कभी यादों की हल्की दस्तक— इन्हीं सबके बीच दिल हर दिन उसी खिड़की से तेरे आने का ख़्वाब देखता है।