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Showing posts from February, 2024

विचारों के बोझ

मन के विचारों को जब अपनी कलम से लेखनबध करती हूं मेरे मन में चल रही उथलपुथल को थोड़ा सुकून का एहसास होता है। मगर, तुम्हारे जीवन के उन पलों में एक अथाह शांति के बाद भूचाल आ जाता है क्युकी मेरे मन के विचार तुमसे ही प्रेरित होते हैं । जरा सोचो, जिन विचारों को पढ़ के तुम इतने परेशान हुए जाते हो हम उन विचारों के बोझ को हर रोज खुद अपने कंधो पे ढोते हैं। ✍️ अंजली

तेरी मेरी प्रेम कहानी

प्रेम!!! ढाई अक्षर का ये शब्द आखिर कितना खूबसूरत होता है न सुनने में, बोलने में, महसूस करने में, और साथ ही इसके होने के एहसास होने पे। मगर क्या हम सही मायने में इसे समझ पाए? क्या सच में इस ढाई अक्षर को पढ़ के हम पंडित कहला पाए? आखिर क्या है ये प्रेम? जिसे होने में तो चंद मिनट भी नही लगते मगर समझने में सदियों गुजर जाते हैं। किसी के लिए प्राकृतिक का सौन्दर्य प्रेम है, तो किसी के लिए बाल मन ही प्रेम है, किसी के लिए ईश भक्ति प्रेम है, तो किसी के लिए कला साधना ही प्रेम है, किसी के लिए किसी को पा लेना प्रेम है, तो किसी के लिए किसी का हो जाना ही प्रेम है, किसी के लिए कृष्ण की भक्ति में लीन मीरा, तो किसी के लिए राधा नाम ही प्रेम है, किसी के लिए वियोगी सीता और राम प्रेम है, तो किसी के लिए शिव में सती होना ही प्रेम है। प्रेम एक ही है मगर उसके रूप अनेक है क्युकी ये एक शब्द मात्र ही नहीं अपितु भाव है जो प्रेमी के भाव से उपजता है और उसी में विलीन हो जाता है। जब मैं छोटी थी, तब माँ के आँचल और पापा की गोद में छुपा था प्रेम। भाई बहनों के साथ मुझे लुका-छिपी खेलने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती थी और प्रे...